भारत में ज्ञान का वातावरण बनाना: प्रगति का एक दशक
उच्च शिक्षा, ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर भारत की यात्रा का एक अहम आधार और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी ) 2020 का एक मुख्य स्तंभ है। यह नीति एक ऐसी शिक्षा प्रणाली की कल्पना करती है, जो सर्वांगीण और बहु-विषयक शिक्षा को बढ़ावा दे और एसडीजी 4 के लक्ष्यों को आगे बढ़ाए।
सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) 4 का मकसद सभी के लिए समावेशी और समान गुणवत्ता वाली शिक्षा सुनिश्चित करना और जीवन भर सीखने के अवसरों को बढ़ावा देना है। शिक्षा मंत्रालय भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों का सालाना सर्वे करता है।
शिक्षा मंत्रालय द्वारा हर साल किया जाने वाला ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन ( एआईएसएचई ), देश भर के उच्च शिक्षा संस्थानों के बारे में व्यापक और ठोस जानकारी देता है। यह डेटा एनईपी 2020 के तहत उच्च शिक्षा में हो रहे सुधारों की प्रगति को ट्रैक करने, उभरती कमियों की पहचान करने और नीतिगत फैसले लेने में मदद करता है।
एआईएसएचई की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दशक में भारत के उच्च शिक्षा नेटवर्क में काफी विस्तार हुआ है।
• विश्वविद्यालयों की संख्या 2014–15 में 760 से बढ़कर 2023–24 में 1,289 हो गई, जो 69.6% की वृद्धि को दर्शाता है।
• कॉलेजों की संख्या 38,498 से बढ़कर 48,246 हो गई, जो 25.3% की वृद्धि है।
• स्टैंडअलोन संस्थानों की संख्या 12,276 से बढ़कर 15,221 हो गई, जिसमें लगभग 24% की वृद्धि दर्ज की गई।
यह विस्तार संस्थानों के बढ़ते आधार और देश भर में सीखने वालों की सेवा करने की बेहतर क्षमता को दर्शाता है। इसने उच्च शिक्षा की पहुँच को मज़बूत किया है, व्यापक भागीदारी को बढ़ावा दिया है और भारत के भविष्य के लिए एक अधिक सुलभ , विविध और समावेशी ज्ञान व्यवस्था बनाने में योगदान दिया है।
छात्रों के नामांकन में वृद्धि: समानता और समावेश को बढ़ावा
पिछले दशक में भारत में उच्च शिक्षा में नामांकन लगातार बढ़ा है, यह 2014–15 में 3.42 करोड़ छात्रों से 31.5% बढ़कर 2023–24 में 4.50 करोड़ हो गया है।
हायर एजुकेशन आउट-टर्न का मतलब है, किसी खास अकादमिक वर्ष में उच्च शिक्षण संस्थानों से पास होने वाले छात्रों की कुल संख्या।
जेंडर पैरिटी इंडेक्स (जीपीआई) महिलाओं और पुरुषों के जीईआर का अनुपात है, जो शिक्षा प्रणाली में महिलाओं की समान भागीदारी को दर्शाता है।
साइंस , टेक्नोलॉजी , इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स (स्टेम ) में नामांकन
पिछले दशक में उच्च शिक्षा में विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स (स्टेम) में नामांकन लगातार बढ़ा है।
कुल नामांकन 2014–15 में 91.5 लाख से बढ़कर 2023–24 में 1.02 करोड़ हो गया, जो इस दौरान लगभग 11.5% की कुल बढ़ोतरी को दिखाता है।
यह बढ़ोतरी संस्थानों की बढ़ती क्षमता और स्टेम विषयों में छात्रों की लगातार रुचि को दर्शाती है। इसे सरकारी पहलों, डिजिटल टेक्नोलॉजी, नवाचार, अनुसंधान और रोज़गार के अवसरों से बढ़ावा मिला है, जो भारत की ज्ञान अर्थव्यवस्था को मज़बूत कर रहे हैं।
उच्च शिक्षा में शिक्षकों की संख्या 2014–15 में 14.73 लाख से बढ़कर 2023–24 में 17.32 लाख हो गई। इस दौरान शिक्षकों की संख्या में कुल 2.59 लाख की बढ़ोतरी हुई , जो लगभग 17.6% की वृद्धि है।
2014–15 और 2023–24 के बीच, उच्च शिक्षा संस्थानों में बुनियादी ढांचागत सुविधाओं में काफी सुधार हुआ है। सभी संस्थानों में फिजिकल और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर और महिलाओं व दिव्यांगों के लिए अलग-अलग सुविधाएं विकसित की गई हैं। 2023–24 में:
इसके अलावा, ज़्यादातर विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और स्टैंडअलोन संस्थानों में स्वास्थ्य केंद्र, कौशल विकास और कंप्यूटर सेंटर, ऑडिटोरियम और कॉन्फ्रेंस हॉल जैसी सुविधाएं भी मौजूद थीं।
पिछले दशक में भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र का काफ़ी विस्तार हुआ है , जिसमें संस्थानों , नामांकन , शिक्षकों की संख्या और पास होने वाले छात्रों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। सकल नामांकन अनुपात (जीईआर ), महिलाओं की भागीदारी , जेंडर समानता और एससी, एसटी व अन्य वंचित समूहों को शामिल करने में हुए सुधार, बेहतर पहुँच और समानता को दर्शाते हैं।
स्टेम और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के नामांकन में वृद्धि भारत की ज्ञान व्यवस्था के मज़बूत होने का संकेत देती है। ये सभी उपलब्धियाँ मिलकर एनईपी 2020 के उस असर को उजागर करती हैं , जिसने गुणवत्ता , समावेशिता और उत्कृष्टता को बढ़ावा दिया है।
साइट को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (एनआईसी) द्वारा होस्ट किया जाता है । इस पर सूचनाएं पत्र सूचना कार्यालय, "ए" विंग, शास्त्री भवन, डॉ राजेंद्र प्रसाद रोड़, शास्त्री भवन, नई दिल्ली – 110001, फोन : 23389338 द्वारा उपलब्ध करवाई जाती है और अद्यतित की जाती है ।
मुख्य बातें
- भारत में ज्ञान का वातावरण बनाना: प्रगति का एक दशक उच्च शिक्षा, ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर भारत की यात्रा का एक अहम आधार और राष्ट्रीय…
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स्रोत और संदर्भ
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 21 सितंबर 2026।


