जिले के परासिया विकासखंड के ग्राम बिचकवाड़ा निवासी किसान श्री गुरु पवार ने यह साबित कर दिया है कि खेती में नई सोच, आधुनिक तकनीक और सही मार्गदर्शन के साथ सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है। आज वे स्वीट कॉर्न की खेती से लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं, लेकिन उनकी यह सफलता वर्षों की मेहनत, सीख और बदलाव की कहानी है।

कुछ वर्ष पहले तक श्री गुरु पवार पारंपरिक फसलों की खेती करते थे। खेती से होने वाली आय सीमित थी और बढ़ती लागत के कारण अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता था। मौसम की अनिश्चितता और बाजार की परिस्थितियों के कारण कई बार मेहनत के अनुरूप आमदनी नहीं हो पाती थी। परिवार की जरूरतों को पूरा करने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की चिंता हमेशा बनी रहती थी।

मेहनत ने जब नई राह चुनी, खेतों ने सोना उगला, हौसलों के संग बढ़े कदम, तो हर सपना सच निकला। इसी दौरान कृषि विभाग की आत्मा परियोजना के माध्यम से श्री गुरु पवार को स्वीट कॉर्न की खेती की जानकारी मिली। विभागीय अधिकारियों द्वारा उन्हें उन्नत कृषि तकनीकों, फसल प्रबंधन, सिंचाई व्यवस्था और विपणन संबंधी आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया।

उन्होंने नई जानकारी को अपनाने का साहस दिखाया और पारंपरिक खेती के साथ-साथ स्वीट कॉर्न का उत्पादन प्रारंभ किया। शुरुआती सफलता ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। बेहतर बाजार मांग और कम अवधि में तैयार होने वाली इस फसल ने उन्हें नई संभावनाएं दिखाई। धीरे-धीरे उन्होंने स्वीट कॉर्न की खेती का रकबा बढ़ाया और आज वे लगभग 70 एकड़ क्षेत्र में इसकी खेती कर रहे हैं।

उन्नत तकनीक, बेहतर फसल प्रबंधन और बाजार की सही जानकारी के कारण उन्हें स्वीट कॉर्न की खेती से लगभग 40 लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई। यह उपलब्धि न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार लेकर आई, बल्कि उन्हें क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों में भी पहचान दिलाई। आय के साथ बढ़ी मिट्टी की सेहत - स्वीट कॉर्न की विशेषता केवल अधिक आय तक सीमित नहीं है।

भुट्टों की तुड़ाई के बाद खेत में बची हुई कड़वी और अन्य फसल अवशेषों को श्री गुरु पवार रोटावेटर की सहायता से मिट्टी में मिला देते हैं। इससे खेत में जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ती है और भूमि की उर्वरता में सुधार होता है। वे बताते हैं कि स्वीट कॉर्न कम अवधि की फसल है, इसलिए खेत जल्दी खाली हो जाता है।

इससे समय पर आलू की बुवाई हो जाती है, जिसके कारण आलू की उत्पादकता में भी वृद्धि हुई है। इस प्रकार स्वीट कॉर्न उनकी फसल प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। बदला जीवन, बने प्रेरणा स्रोत - आज श्री गुरु पवार का जीवन पहले की तुलना में काफी बदल चुका है। खेती से होने वाली बढ़ी आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है।

आधुनिक कृषि संसाधनों का उपयोग बढ़ा है और खेती के प्रति उनका आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है। उनकी सफलता को देखकर आसपास के सैकड़ों किसान भी स्वीट कॉर्न की खेती अपना रहे हैं। वर्तमान में क्षेत्र के अनेक किसान स्वीट कॉर्न का उत्पादन कर रहे हैं और यहां से उत्पादित स्वीट कॉर्न देश के प्रमुख शहरों तक भेजा जा रहा है। इससे किसानों को बेहतर बाजार और बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहे हैं।

श्री गुरु पवार की यह प्रेरणादायक कहानी बताती है कि यदि किसान नई तकनीकों को अपनाएं, वैज्ञानिक पद्धतियों से खेती करें और बाजार की मांग के अनुरूप फसल चयन करें, तो खेती को लाभदायक व्यवसाय में बदला जा सकता है। उनकी सफलता आज क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है और यह संदेश देती है कि बदलाव की शुरुआत एक सही निर्णय से होती है।