राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत मंगलवार को विकासखंड लांजी के ग्राम कारंजा में किसानों के बीच जागरूकता अभियान आयोजित किया गया।

कृषि विभाग आत्मा समिति के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में कृषकों को प्राकृतिक एवं पर्यावरण हितैषी खेती अपनाने के साथ फसलों में कीट-रोग नियंत्रण के विभिन्न उपायों की जानकारी दी गई।कार्यक्रम में विकासखंड तकनीकी प्रबंधक अजय बिजेवार ने किसानों को जीवामृत, घनजीवामृत तथा जैविक कीटनाशक ब्रह्मास्त्र एवं नीमास्त्र तैयार करने और इनके उपयोग की विस्तृत जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि इन जैविक उपायों का उपयोग धान सहित अन्य फसलों में कीट नियंत्रण के लिए किया जा सकता है। माहू एवं तना छेदक के नियंत्रण के लिए ब्रह्मास्त्र एवं नीमास्त्र का 3 से 5 लीटर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करने की सलाह किसानों को दी गई।

सीधी बुवाई वाले धान खेत का किया निरीक्षण

अभियान के दौरान कृषक हेमेंद्र उमरे के खेत में लगी धान की सीधी बुवाई वाली फसल का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में पाया गया कि सीधी बुवाई वाले धान में तना छेदक एवं माहू का प्रकोप अपेक्षाकृत कम है। किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने तथा प्रारंभिक अवस्था में ही जैविक उपायों से कीट नियंत्रण करने की सलाह दी गई।

तना छेदक के प्रकोप की पहचान समझाई

कृषकों को बताया गया कि धान की फसल में तना छेदक का प्रकोप सामान्यतः दो अवस्थाओं में देखने को मिलता है। पहली अवस्था रोपाई के लगभग 20-25 दिन बाद तथा दूसरी अवस्था लगभग 60-65 दिन बाद आती है। अधिक प्रकोप होने पर प्रभावित पौधों की बालियां सफेद एवं पोची निकलती हैं।

ऐसी बालियों को बाहर खींचने पर वे आसानी से बाहर आ जाती हैं तथा निचली सतह पर तना छेदक की इल्ली द्वारा छोड़ा गया मल दिखाई दे सकता है। ऐसी स्थिति में किसानों को तत्काल नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी गई।अधिक प्रकोप की स्थिति में कृषि विभाग द्वारा तना छेदक नियंत्रण के लिए अनुशंसित रासायनिक विकल्पों में से किसी एक का उपयोग करने की सलाह दी गई।

इनमें कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड 50 प्रतिशत एसपी 250 ग्राम प्रति एकड़, क्लोरपायरीफॉस 50 प्रतिशत ईसी 400 मिली प्रति एकड़, प्रोफेनोफॉस 50 प्रतिशत ईसी 400 मिली प्रति एकड़ अथवा इमामेक्टिन बेंजोएट 5 प्रतिशत एसजी 100 ग्राम प्रति एकड़ की दर से उपयोग की जानकारी दी गई।माहू के नियंत्रण के लिए पाइमेट्रोजिन 50 प्रतिशत डब्ल्यूजी 100-120 ग्राम प्रति एकड़, डायनोटेफ्यूरान 20 प्रतिशत एसजी 100 ग्राम प्रति एकड़ अथवा ट्राइफ्लूमेजोपाइरिम 10.6 प्रतिशत एससी 96 मिली प्रति एकड़ में से अनुशंसित विकल्प के अनुसार उपयोग की सलाह दी गई।

वहीं धान में शीथ ब्लाइट रोग की स्थिति में कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी 500 ग्राम तथा स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 6 ग्राम प्रति एकड़ के उपयोग की जानकारी किसानों को दी गई।कार्यक्रम में कृषि विभाग आत्मा समिति से विकासखंड तकनीकी प्रबंधक अजय बिजेवार, कृषि सखी भुवनेश्वरी उमरे एवं ऊषा भटेरे उपस्थित रहीं।

इस दौरान किसानों ने प्राकृतिक खेती से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त की तथा फसल में कीट एवं रोगों की पहचान और नियंत्रण के संबंध में मार्गदर्शन लिया।